मदन गोपाल नंदजीको लाल प्रभुजी॥ध्रु०॥
बालपनकी प्रीत बिखायो। नवनीत धरियो नंदलाल॥१॥
कुब्जा हीनकी तुम पत राखो। हम ब्रीज नारी भई बेहाल॥२॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। हम जपे यही जपमाल॥३॥
मदन गोपाल नंदजीको लाल प्रभुजी॥ध्रु०॥
बालपनकी प्रीत बिखायो। नवनीत धरियो नंदलाल॥१॥
कुब्जा हीनकी तुम पत राखो। हम ब्रीज नारी भई बेहाल॥२॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। हम जपे यही जपमाल॥३॥