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मन की क्या परतीत / शिवदीन राम जोशी

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मन की क्या परतीत रीत है मन की न्यारी |
मन मातंग बलवान समझ थोरी में सारी ||
अंकुश ज्ञान समान और अंकुश ना यारो |
छिन में मन उड़जाय सज्जनों बात विचारो ||
संत शरण शरणागति मन की छूटे दौर |
शिवदीन भरोसो संत पर नहीं मंत्र कोई और ||
                      राम गुण गायरे ||