भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मन से प्रभू का भजन करना होली मतवाला) / आर्त

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मन से प्रभू का भजन करना
देखो न दामन मे दाग लग जाए, गन्‍दी डगर न कदम धरना।।

काल गहे कर्मों का लेखा , जैसा करे फल वैसा ही देखा
’आर्त’ मगन मन प्रभू गुन गाये , भव से तरन का जतन करना ।।

‘आर्त’ दुखी की सेवा किये जा, धरम करम की राह चले जा
देखो न जीवन वृथा बीत जाये , जग में भला ही करम करना ।।
अंजनि लला के चरण मन लाओ, पडि कुसंग न अपयश कमाओ ।

हनुमत चरित सुनत मन हरषे , दुइनो नयन नेह जल बरसे
देखो न दुनिया तुम्‍हे गरियाये , दुष्‍कर्मों से शरम करना ।।