भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मरता नहीं है कोई किसी के लिए मगर / शिवशंकर मिश्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मरता नहीं है कोई किसी के लिए मगर
जी पाया भी कभी न अकेला कोई बशर
यों ही बने ये घर न तो यों ही बना समाज
यों ही बसे न गाँव, न यों ही बसे शहर