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महँगाई / रामनिरंजन शर्मा 'ठिमाऊ'

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पप्पू ने दीदी से पूछा
क्या होती महँगाई?
सभी इसी की चर्चा करते
चली कहाँ से आई?

सभी किताबें देखीं मैंने
कहीं न मीनिंग पाया,
आज सवेरे ‘सर’ से पूछा
सर ने सिर खुजलाया।

हम दोनों की गुल्लक दीदी
मम्मी ने क्यों खोले?
और कान में आज दूधिए-
के पापा क्या बोले।

सब चीजों की हुई कटौती
पापा जी झल्लाते,
ज्यादा सब्जी ले लेने पर
मम्मी पर चिल्लाते।

मटर-टमाटर बंद हुए हैं
आलू-गाजर खाते,
सेब-संतरे कभी न देखे
पापा मूली लाते।

सब चीजों के पप्पू भैया
लगते दुगने पैसे,
पापा पैसे वही कमाते
सेब मँगाएँ कैसे?

चीजें कम हैं, और बरतने
वालों ने भीड़ लगाई,
इसीलिए तो भाव बढ़े हैं
आ धमकी महँगाई।