मैथिली लोकगीत ♦ रचनाकार: अज्ञात
माइ हे सात बहिन हम योगिनी नैनहु थिकी जेठ बहिनी
माइ हे तिनकहुसँ योग सिखल तिन भुवन योग हांकल
माइ हे समुद्रहु बान्ह बन्हाओल तैं हम योगिनी कहाओल
माइ हे तरहथ दही जनमयलहुँ तैं हम योगिनी कहेलहुँ
माइ हे सुखायल गाछ पन्हगेलहुँ तैं हम योगिनी कहेलहुँ
माइ हे बांझिक कोखि पलटलहुँ तैं हम योगिनी कहेलहुँ
माइ हे भनहि विद्यापति गाओल योगिनीक अन्त न पाओल