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मिनख / ओम पुरोहित कागद

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गुड़गुड़ांवतो होक्को !
जित्तै खड़कै
बित्तै भड़कै
जकै दिन आग खत्म
अर खड़को बंद
उणी दिन
मिनख रो
मिनख नै
धड़को बंद !