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मीठी थूली ओ सायबा दूद से / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मीठी थूली ओ सायबा दूद से
जेको अजब सवाद
लाडू पेड़ा हो सायबा लापसी
जेको बड़ो रे सवाद
गोदी भरी हो सायबा पूत से
जेको अनन्द उछाव
मेलां फूले हो सायबा केवड़ो
जेकी आवे परमल बास।