भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

में तो अकेली म्हारो घर न लुटाय दीजो / मालवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

में तो अकेली म्हारो घर न लुटाय दीजो
घर न लुटाय दीजो, बन न कराय दीजो
सासू सुणें तो पिया उन्हें मत आवन दीजो
ललना खेलावन म्हारा माता खे बुलाव दीजो
जेठाणी सुणे तो पिया उन्हें मत आवन दीजो
रसोई निपावन म्हारी काकी खे बुलाय लीजो
नणंदी सुणे तो पिया उन्हें मत आवन दीजो
सांतीपुड़ा मांडण म्हारी बून्या बुलाय लीजो
पड़ोसन सुणे तो पिया उन्हें मत आवन दीजो
मंगल गावण म्हारी सखियां बुलाय लीजो
ढोली सुणे तो पिया उन्हें मत आवन दीजो
ढोली म्हारा पीयर से बुलाय लीजो
जोसी सुणे तो पिया उन्हें मत आवन दीजो
जोसी म्हारा पीयर से बुलाय लीयो।