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मेरी थकन के हवाले बदलती रहती है / मुनव्वर राना

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मेरी थकन के हवाले <ref>संदर्भ,references</ref>बदलती रहती है
मुसाफ़िरत<ref>यात्रा</ref>मेरे छाले बदलती रहती है

मैं ज़िंदगी! तुझे कब तक बचा के रक्खूँगा
ये मौत रोज़ निवाले<ref>ग्रास</ref>बदलती रहती है

ख़ुदा बचाए हमें मज़हबी सियासत <ref>धर्मों की राजनीति</ref>से
ये खेल खेल में पाले बदलती रहती है

उम्मीद<ref> आाशा</ref>रोज़ <ref>नित्य</ref>वफ़ादार ख़ादिमा <ref>नौकरानी</ref>की तरह
तसल्लियों के प्याले बदलती रहती है

तुझे ख़बर नहीं शायद कि तेरी रुस्वाई<ref>बदनामी</ref>
हमारे होंठों के ताले बदलती रहती है

हमारी आरज़ू मासूम लड़कियों की तरह
सहेलियों से दुशाले बदलती रहती है

बड़ी अजीब है दुनिया तवायफ़ों <ref>वेश्याओं, नगर-वधुओं</ref>की तरह
हमेशा चाहने वाले बदलती रहती है

शब्दार्थ
<references/>