Last modified on 15 जुलाई 2010, at 01:31

मेरे सामर्थ्य को चुनौती मत दो / राजेश चड्ढा

  
मेरे सामर्थ्य को चुनौती मत दो,
दर्द में बेशक कटौती मत दो ।

बंधक है मेरे पास ख़ुदगर्ज़ी आपकी,
मुझे सहानुभूति की फ़िरौती मत दो ।

रोशनी उधार की घर चाट जाएगी,
अपने नाम की रंगीन ज्योति मत दो ।

छीन कर खाने की तुम्हें आदत है,
मेरे मासूम से बच्चे को रोटी मत दो ।