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मेरे सुबूत बहे जा रहे हैं पानी में / फ़रहत एहसास

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मेरे सुबूत बहे जा रहे हैं पानी में
किसे गवाह बनाऊँ सराए-फानी(1) में 1.नाशवान सराय

जो आँसुओं में नहाते रहे वो पाक रहे
नमाज़ वर्ना किसे मिल सकी जवानी में

भड़क उठे हैं फिर आँखों में आँसुओं के चिराग़
फिर आज आग लगा दी गई है पानी में

हमीं थे ऐसे कहाँ के अपने घर जाते
बड़े-बड़ों ने गुजारी है बे-मक़ानी में

ये बेकनार(1) बदन कौन पार कर पाया 1. जिसका कोई किनारा न हो
बहे चले गए सब लोग इस रवानी में

विसालो-हिज्र के ही एक चिराग़ थे दोनों
सियाह होके रहे शब की बेकरानी(1) में 1. दूर तक फैला हुआ

कहानी ख़त्म हुई तब मुझे ख़याल आया
तेरे सिवा भी तो किरदार थे कहानी में ।