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मेहनत से हम बने नवाब / बालकृष्ण गर्ग

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बात-बात जो खाएँ ताव,
उनका रहता नहीं रुआब।
प्यार-भरा बरताव, जनाब।
अपना रखता नहीं जवाब।

पड़े-पड़े जो देखें ख्वाब,
ऐसे रहें निठल्ले सा’ब!
खाली रहना करे खराब,
मेहनत से हम बने नवाब।
[बाल-भारती, नवंबर 1983]