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मैं तोर गुन जानि गयूँ ए नान गुटकी / अवधी

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   ♦   रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह

मैं तोर गुन जानि गयूँ ए नान गुटकी

दाल बनाईं भात बनाईं और बनाईं फुलकी,
सारा जेवना जेई के भर्तार पति के आगे ठुनकी
मैं तोर गुन...

लौंग इलाइची बीरा खाईं आवै लागीं हिचकी,
सीसा लै के मुंह निहारें गाल होई गे सुट्की
मै तोर गुन...

मारी गईं पीटी गईं कोने जाए सुसकी,
तनिक नैना ओट भएँ बांधे लागी पुटकी
मैं तोर गुन...

सेज सुपेती दासन पाइन संझवय से खसकी,
सारे पलंग पर अपना सोवैं पिया का काटें चुटकी
मैं तोर गुन...