भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

मैं तोहे पूछूँ रे भवरिला / निमाड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मैं तोहे पूछूँ, रे भवरिला,
सब रस काहे का होय,
रटणऽ करो रे अपणा देश मऽ
रस अम्बो, रस आमली,
सब रस लिम्बुआ को होय,
रटणऽ करो रे अपणा देश मऽ
मैं तोहे पूछूँ, रे भवरिला,
सब रंग काहे का होय,
रंग छापा रे रंग चूनड़ी,
सब रंग कुसुमळ होय,
रटणऽ करो रे अपणा देश मऽ
मैं तोहे पूछूँ, रे भवरिला,
सब सुख काहे का होय,
सुख सासरो, सुख मायक्यो,
सब सुख पुत्र को होय,
रटणऽ करो रे अपणा देश मऽ