भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मैं थक कर चूर होना चाहता हूँ / विजय वाते

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैं थक कर चूर होना चाहता हूँ|
मैं तुझ से दूर होना चाहता हूँ|

बहुत कुछ सह लिया है नर्म रहकर,
ज़रा मगरूर होना होना चाहता हूँ|

मैं उस छोटे सितारे की तरह ही,
तनिक मशहूर होना चाहता हूँ|

सभी मजबूर हैं दुनिया के हाथों,
मैं ख़ुद मजबूर होना चाहता हूँ|

"विजय" हमने कहा हैं ख़ुद से अक्सर,
मैं ख़ुद में नूर होना चाहता हूँ|