भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

मैया के भुवन अरे हा अखण्डी ज्योति जरे / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मैंया के भुवन अरे हां, अखण्डी ज्योति जरे।
काहे के दीया काहे के बाती काहे के कलश धरे
अखण्डी ज्योति जरे। मैंया...
सोने की दीया कपूर की बाती, सोने के कलश धरे
अखण्डी ज्योति जरे। मैंया...
कौना मंदिर में जोत जरावे, कौना कलश धरे
अखण्डी ज्योति जरे। मैंया...
सीता सुहागन जोत जरावें, राम जी कलश धरे
अखण्डी ज्योति जरे। मैंया...
सब वेदन मे तोरो जस गावे
अखण्डी ज्योति जरे। मैंया...