भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

मैया महक रहे तोरे बाग मदिरवा गर के / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मैया महक रहे तोरे बाग, मंदिरवा एंगर के।
चम्पा चमेली केतकी फूली,
मैया फूल रही कचनार। मंदिरवा...
फूले गुलाब चांदनी बेला,
केवरा की है बहार। मंदिरवा...
कमल कुमुदनी मोंगरा फूलो,
फूल रहे गुलदाख। मंदिरवा...
दिन के राजा रात की रानी,
फूलन की भरमार। मंदिरवा...
भांति-भांति के फूल खिले हैं,
बरने कौन प्रकार। मंदिरवा...
उन फूलन के बने हैं गजरे,
देवी को होत शृंगार। मंदिरवा...