भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मोबाइल / स्वरांगी साने

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कहीं से मिला तुम्‍हारा फ़ोन नम्बर
पर बात नहीं की तुमसे
और
सूरज का ही तकिया बना सो गई

सिरहाने रखे सूरज को
कभी भी टाँका जा सकता था आसमान में
शुरू किया जा सकता था दिन
और चाहे जब तुमसे बात भी
की जा सकती थी

पर दोनों ही काम नहीं हुए
हिम्‍मत ही नहीं हुई
तुम्‍हारा नम्बर मिलाने
या
सूरज से दो-चार होने की भी।