यमुना जल भरन गई अहीरों की छोरी संग,
राधिका रसीली फँसी कृष्ण श्याम कारे से |
ता दिन से एको पल बिसरत ना सूरत वह,
लरे नैन मेरे नैन नैन मतवारे से |
कहा करूं जाऊ कहाँ कौन सुने बात मेरी,
मोकू मिलवाय दे नेक नीक प्राण-प्यारे से |
कहता शिवदीन अहो ! बसों चाल वृन्दावन,
मन मोहन मिलेंगें मोही यमुना के किनारे से |