भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

याद में उसकी भीगा कर / हस्तीमल 'हस्ती'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मोहरे, शह और मात अलग थी
बाज़ी मेरे हाथ अलग थी

दौलत खूब कमाई लेकिन
उस दर की सौग़ात अलग थी

सब थे उसके आगे-पीछे
लेकिन मेरी ज़ात अलग थी

मैंने जिसके सपने देखे
यारो वो बरसात अलग थी

वो भी अलग था कुछ अपने में
अपनी भी कुछ बात अलग थी