Last modified on 13 मार्च 2018, at 20:45

यों तो बेइमान ही अक्सर देखे हैं / रंजना वर्मा

यों तो बेइमान ही अक्सर देखे हैं
इंसां कुछ मन के भी सुन्दर देखे हैं

पलक झपकते ही जो रहजन बन जाते
हम ने कुछ ऐसे भी रहबर देखे हैं

जिनके घर थी भूंजी भाँग नहीं मिलती
हैं हालात हुए कुछ बेहतर देखे हैं

जिनमें है ताकत संसार डुबोने की
सीमाओं में बहते सागर देखे हैं

बड़े प्यार से जिनकी साज सँभाल रखी
गर्दन पर फिरते वह नश्तर देखे हैं

जिन हाथों को चूमा प्यार किया हमने
आज उन्हीं हाथों में पत्थर देखे हैं

जिनकी जग में तूती थी बोला करती
हाथ पसरते उनके घर-घर देखे हैं