भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रंग लगे अंग / जानकीवल्लभ शास्त्री

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रंग लाए अंग चम्पई
नई लता के
धड़कन बन तरु को
अपराधिन-सी ताके
फड़क रही थी कोंपल
आँखुओं से ढक के
गुच्छे थे सोए
टहनी से दब, थक के

औचक झकझोर गया
नया था झकोरा,
तन में भी दाग लगे

मन न रहा कोरा

अनचाहा संग शिविर का,
ठंडा पा के
वासन्ती उझक झुकी,
सिमटी सकुचा के