भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रतन / मिल के बिछुड़ गईं अँखियाँ

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रचनाकार: ??                 

मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ

मुशक़िल से वो दिन भुलाये थे हमने
फिर आ के छेड़ा बलम ने
फिर से धरक गईं छत्तियाँ
धरक गईं छत्तियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ

रोते हैं नैना जिया तलमलाये
जावो कोई उनको लाये
कैसे बिताऊँ दिन-रतियाँ
बिताऊँ दिन-रतियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ..