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राज अपने तुमको बताती गयी / भावना कुँअर

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राज अपने तुमको बताती गयी
नजदीक दिल के यूँ आती गयी ।

हर दम रहता तेरा ही ख्याल
यूँ ख्वाब तेरे सजाती गयी ।

बंदिश तो न थी तेरे प्यार में
बन्धन में कैसे समाती गयी ?

मंजिल को पाने की ही चाह में
कदमों को अपने बढ़ाती गयी ।

तुम जो मिले ज़िदंगी में प्रिये
दुनिया मैं अपनी बसाती गयी ।