भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रात में / क्लो दुरी बेज़्ज़ोला

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रात में
चाँद
ज्वार-भाटॊं के बीच
बूमरैंग फेंकता है

मेरे विचार
उथले पानी में
मछलियों की तरह छटपटाते हैं
अपने चँदेरी बाजू दिखलाते हुए
मेरा मुँह
शब्दों के बुलबुले
उठाता है

जब रेत
समन्दर को छानती है
अबाबीलें स्वर्ग से गिरती हैं
और मेरे खतों को
उठा ले जाती हैं
कुछ नहीं बचता

सिर्फ़ उनकी उड़ान

अनुवाद : विष्णु खरे