भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रापटरोळो राज रौ / महेन्द्रसिंह सिसोदिया 'छायण'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

  ::-दूहा-::
__________________

चूंपै कुरसी चाव सूं,रोज जमावण रंग|
जीतै जग में जोयलो,डाटी ठोक दबंग||

छंद :- त्रिभंगी
____________________

जकडै़ घड़ जाळा,बण विकराळा,डाळा डाळा,नित फिरणा|
माड़ू मतवाळा,मन रा काळा,रापट राळा,हैं करणा|
जा जा मधुशाळा,पीवै हाळा,करै ज चाळा,जिम प्रेता|
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा जननेता||1||

सह माल पुराणा,सारा दाणा,हो अगवांणा,चुग जावै|
ला लाय किराणा,चारा छाणा,कूड़ कमाणा,मन भावै||
प्रमोशन पाणा,खा खा खाणा,धूड़ उडा़णा,जन नेता|
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जन नेता||2||

दल बल सब दूरं,स्वारथ सूरं,कर भरपूरं,कांड नया|
दूरा दिस टूरं,पागी बूरं,करै गरूरं,जोर पया||
बण भांड जरूरं,निर्दय क्रूरं,चकनाचूरं,कर रैता|
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जन नेता||3||

भड़कै भिड़ जावै,मौज मनावै,माल खपावै,खट दैणी|
बातां कर ठावै,भासण भावै,प्लान बणावै,धट दैणी|
सब कुछ खा जावै,लाज न आवै,म्हैल चिणावै,ले खेतां |
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जननेता||4||

आ रीत निभावां,हिळमिळ खावां,पैसा पावां,देख सखा|
झट मंच सजावां,माळा ल्यावां,ताळ बजावां,दोय पखा|
भासण भड़कावां,तान सुणावां,वोट दिरावां,जन नेता|
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जननेता||5||

अबकै बण जासी,आछी खासी,आसी रासी, देख भय्या|
सड़कां नव ठासी,हॉल बणासी,पार लगासी,तव नैय्या|
सगळा दळ मासी,बहु बकवासी,झौड़ झकासी,कर लेता|
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जन नेता||6||

जयकार करावां,कूड़ कथावां,भूंड दिरावां,सगळा नै|
सरकार गिरावां,पंच जुटावां,और डरावां,जनमन नै||
नव वेश धरावां,मीत बणावां,चमचा चावां,यूं कैता|
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जन नेता||7||

कर भ्रष्टाचारं,बारं बारं,उपजा खारं,मन मांही|
रे ! धुंवाधारं,अर अंधारं,पंथं न्यारं,चल राही||
जीतै या हारं,तुकड़म त्यारं,इसडा़ यारं,छळ नेता||
बाहूबळ वाळा,कपटी काळा,राज रूखाळा,जननेता||8||

       सोरठा
____________________

कुरसी खातर कूड़,बोले नेता बेलियो|
धवळै केसां धूड़,कद पड़सी रे कानजी||
विटळां नर बदमास,राजनीत री राड़ में|
फटकै देवै फांस,कूड़ तणौ जग कानजी||
दृग तिहारै देख,रापटरोळो राज रौ|
कपटी खेले कै'क,कूड़ तणा रे कानजी||
एक'र पूछौ आय,हाल देस रा हेत सूं|
म्हारी भारत माय,कुरळावै हैं कानजी||
गीता वाळौ ज्ञान,दीजै फिर इण देस में|
सायत रैसी शान,कांण ऊजळी कानजी||