भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रामलीला हो चुकी है / ज्ञान प्रकाश आकुल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रामलीला हो चुकी है,
दर्शकों के दल घरों में खो गये।

और पात्रों ने उतारे
मुकुट , बंदर के मुखौटे
काम जिनके पास था तो
काम पर वे लोग लौटे,
धो लिया चेहरा ज़रा सा,
राक्षस सब आदमी से हो गये।

उड़ गयी रंगत गुलाबी
खुल गया फिर रंग भूरा
फिर ग़रीबी मुस्करायी
दिक्कतों ने खूब घूरा,
लौटने का मन नहीं था,
पर ज़रूरत ने बुलाया तो गये।

क्या विजेता क्या पराजित
मंच के नीचे खड़े हैं
धनुष,रावण के खडग सब
एक झोले में पड़े हैं
आँख में आंसू भरे हैं
राम रावण फिर दरी पर सो गये I