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रामे जकाँ / बुद्धिनाथ मिश्र

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गाम अपनो लगय
आन गामे जकाँ
तैं फिरै छी बने-बोन रामे जकाँ।

ओ जे सरिसोक
हरदी रड.ल खेत छल
आर सपना जे भोरक
ओ समवेत छल
सभ बिला गेल दंडप्रणामे जकाँ
तैं फिरै छी बने-बोन रामे जकाँ।

ओ जे मुस्की छलै
घोघटक तऽर सँ
आर लहठी बजै छल
कोहबर सँ
सभ हेरायल ओठंगर क धाने जकाँ।
तैं फिरैछी बने-बोन रामे जकाँ।

ओ इनारक भरल डोल
छिलकैत जल
एक झलकी ले'
बाटो पियासल छल
सभ भथा गेल
पोखरिक मोहाने जकाँ
तैं फिरै छी बने-बोन रामे जकाँ।