रावरे पठाए जोग देन कौं सिधाए हुते
ज्ञान गुन गौरव के अति उदगार में ।
कहै रतनाकर पै चातुरी हमारी सबै
कित धौं हिरानी दसा दारुन अपार में ॥
उड़ि उधिरानी किधौं ऊरध उसासनि में
बहि धौं बिलानी कहूँ आँसुनि की धार में ।
चूर ह्वै गई धौं भूरि दुख के दरेरनि में
छार ह्वै गई धौं बिरहानल की झार में ॥110॥