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रास्ते पुर-पेच राही रूस्तगार / शोरिश काश्मीरी

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रास्ते पुर-पेच राही रूस्तगार
रहबरों के नक़्श-ए-पा गुम हो गए

ज़बेत-ए-अम्वाज तेरा शुक्रिया
नाव डूबी ना-ख़ुदा गुम हो गए

शैख़ साहब हम-रह-ए-पीर-ए-मुग़ाँ
मय-कदे में क्या हुआ गुम हो गए

ख़ंदा-ए-महर-ए-दरख़्शाँ की क़सम
इस सहर के आश्ना गुम हो गए

अब कहाँ शेर-ओ-सुख़न की रौनक़ें
शाएर-ए-शोला-नवा गुम हो गए