भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रुकमिनी जेवनार बनाए / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

रुकमिनी जेवनार[1] बनाए, मकसूदन[2] जेमन[3] आए जी।
सोभित रतन जड़ाओ[4] कुंडल, मोर मकुट सिर छाजहिं॥1॥
केसर तिलक लिलार[5] सोभित, उर बयजन्तरी[6] माल हे।
बाँहे बिजाइठ[7] सोबरन बाला, अँगुरी अँगुठी सोहहिं॥2॥
सेयाम रूप मँह पीयर बसतर, चकमक झकझक लागहिं।
कनक कंकन, चरन नेपुर, रूप काहाँ लौं बरनउँ॥3॥
जिनकर रूप सरूप मुनिजन, मनहिं मन नित गावहिं।
झारि बिछौना, लाइ झारी[8] सब के पाँव धोवावहि॥4॥
कनक, कलसबा, सुन्नर झारी, गिलास दय आगे धरयो।
अंजुल[9] जोरी विनय करि के, सभें के पाँत बइठावहि॥5॥
कनक थारी में रुचिर ओदन[10] दाल फरक परोसहिं।
सुन्नर भोजन परसि परसि, घीउ[11] ऊपर ढरकावहि॥6॥
साग, बैंगन, अलुआ[12] मूरी, कटहर, बड़हर परोसहि।
अदरख, अमड़ा, अरु करइला, इमली चटनी लावहिं॥7॥
कदुआ, ककड़ी अउर खीरा, राइ दही रहता[13] बनो।
बारा, बजका आउ तिलौरी, हरखि पापर देइ दियो॥8॥
अदउरी, दनउरी आउर मेथौरी, हरखि दही आगे धरयो।
देइ अचमन[14] जल गँगा के, बाद सभे बीरा[15] दियो॥9॥
खाइ बीरा हँसि हँसि बोलथि हरि रुकमिनी का चही[16]
देऊँ परेम परगास हमरा, हाथ जोरि बिनति करी॥10॥

शब्दार्थ
  1. प्रीतिभोज
  2. मधुसूदन, कृष्ण
  3. भोजन करने, खाने
  4. जड़ित
  5. ललाट
  6. वैजयंती
  7. बिजौठा, बाँह में पहनने का एक आभूषण
  8. पानी पिलाने लगा हाथ-मुँह धुलाने के काम में आने वाला एक प्रकार का टोंटीदार बरतन
  9. अंजलि
  10. भात
  11. घी
  12. आलू
  13. रायता
  14. आचमन। हाथ-मुँह धुलाना
  15. बीड़ा
  16. क्या चाहिए