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रूंखड़ा भरै साख / ओम पुरोहित कागद

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जड़ अर चेतन
करै जातरा
पण भंवै कुण?
जगती रो भेजो
जाबक बगनो।

जामण री गोद्यां बैठ
डूंगर भंवै
सुरजी रै चौगड़दै
बादळ सुरजी रै तप
खिंचै साम्हा
करै जातरा
खूटै छिब
पण कद खूटै
अखूट जातरा
जड़ री चेतन में।
रूंखड़ा भरै साख
पगां ताण ऊभ
बगता जातरा में।