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रूपजी : च्यार / पवन शर्मा

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रूप रो धणी मोरियो
नाचै फींचां पाण
पांख्यां नैं ताण
अर
बांच‘र सुणावै
आखै जग नै
आभै मांय मंड्योड़ी
आडी-टेडी ओळ्यां
पण
नीं जाणै
कन्नै ऊभी ढेलणी
आज
कीकर है अणमणी।