भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रूपांतर / जगदीश गुप्त

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गिरती हुई धारों को
तेज़ हवा के झोंके
फुहारों में बदल देते हैं,

दृश्य से परे
देर तक लहराती रहती हैं,
धारों को काटती हुई फुहारें
और फुहारों को काटती हुई धारें

आँख के आगे
हर तरफ़ छा जाता है,
पानी का रूप भी,
रूपांतर भी ।

भीग जाता है,
त्वचा का वन भी,
वनांतर भी ।