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रोपैल’ धनमां / परमानंद ‘प्रेमी’

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चलऽ हे दीदी अब’ रोपैल’ धनमां।
रिम-झिम बरसै छै कारी बदरिया॥
कल’-कल’ डेग धरिहऽ पिछड़ऽ डगरिया।
गिरभ’ त’ टूटी जैथौं हाथऽ के कंगनमां॥
चलऽ हें दीदी अब’ रोपैल’ धनमां॥

पाही धरी खेतबा में गोछी लगैबै।
गीत गाबी-गाबी मऽन बहलैबै॥
जलखय के आस देखै हऽरखोली किसनमां।
चलऽ हे दीदी अब रोपैल’ धनमां॥

बहै पुरबैया त’ गोछी हलराबै।
मने मन घोघी तर रोपनी मुसकाबै॥
गद्गद् भेलै देखी ‘प्रेमी’ के मनमां।
चलऽ हे दीदी अब’ रोपैल’ धनमां॥