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लम्हा इक छोटा सा / भावना कुँअर

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लम्हा इक छोटा सा फिर उम्रे दराजाँ दे गया

दिल गया धड़कन गयी और जाने क्या-२ ले गया ।


वो जो चिंगारी दबी थी प्यार के उन्माद की

होठ पर आई तो दिल पे कोई दस्तक दे गया ।


उम्र पहले प्यार की हर पल ही घटती जा रही

उसकी आँखों का ये आँसू जाने क्या कह के गया ।


प्यार बेमौसम का है बरसात बेमौसम की है

बात बरसों की पुरानी दिल पे ये लिख के गया ।


थी जो तड़पन उम्र भर की एक पल में मिट गयी

तेरी छुअनों का वो जादू दिल में घर करके गया ।