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लाल मिट्टी का लाल सलाम / अरुण चन्द्र रॉय

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1.
कभी
नंगे पैरों में
लगा कर देखो
लाल मिट्टी
जान पाओगे
तुम
बूट भरे पैरों के नीचे
रौंदी जा रही
इस मिट्टी का
लाल रुदन

2.
कभी
नंगे पाँव
पार करके देखो
हमारी कटोरी नदी
इसके कल-कल स्वर में
सुनाई देगी
तुम्हे
मिट्टी की
लाल सिसकियाँ

3.
कभी
बिना हथियार के
बात करके देखो
हरे पत्तों से
और
पत्तों के पीछे छुपी
कोयलों से
सुन पाओगे
तुम
इस मिट्टी का
सबके लिए
लाल सलाम