मन की चट्टान पर
जब भी चोट पड़ती है
सब ओर
एक आग सी फैल जाती है
धुंधआती अधजली आग
ज्वालामुखी होकर
धरती-सी फूट पड़ती है
लोग भूकम्प की बात को
सहज मानते हैं
स्त्री ज्वाला-मुखी हो सकती है
यह भी तो सहज बात है
मन की चट्टान पर
जब भी चोट पड़ती है
सब ओर
एक आग सी फैल जाती है
धुंधआती अधजली आग
ज्वालामुखी होकर
धरती-सी फूट पड़ती है
लोग भूकम्प की बात को
सहज मानते हैं
स्त्री ज्वाला-मुखी हो सकती है
यह भी तो सहज बात है