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लेकिन साफ दिख रहे हो / कुमार विमलेन्दु सिंह

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बादलों वाले
ऐसे ही मौसम में
एक दिन अचानक
हमने बातचीत बंद कर दी थी
एक दूसरे से
कुछ दिनों तक
मैं व्यथित रहा था
कारण जानने के लिए

और तुम्हारा
लगातार चुप रहना
विवश करता रहा
मुझे यह मानने पर
कि ठीक किया है तुमने
गति बहुत तीव्र हो गई थी मेरी
तुमसे संवाद टूटने के बाद
खूब दौड़ा,
जा चढ़ा कई बार
अलग-अलग शिखरों पर
तुम्हारे अलावा
लगभग सब थे
प्रशंसकों की भीड़ में
अब गमन धीमा हो चुका है
ऊपर की तरफ
लेकिन भीड़ तेजी से कम हो रही है
कुछ ही लोग बचे हैं आस-पास

इतने वर्षों बाद
तुमसे बात करने का
बहुत मन हो रहा है
और देखों न...
इस बार कोई दर्पण नहीं चाहिए
तुम्हें देखने के लिए
आँखें बंद करके
थोड़ा अन्दर झाँक के
जब देख रहा हूँ
तो तुम थोड़े अचेत से
लेकिन साफ़ दिख रहे हो