भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

लेहु हजमा सुबरन कसैलिया / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

लेहु[1] हजमा सुबरन कसैलिया[2] नेवतियो[3] लावऽ चारो धाम हे।
गया से नेवतिहऽ[4] गजाधर[5] नेवतिहऽ, नेवतिहऽ बीर हनुमान हे।
गंगा में नेवतिहऽ गंगा मइया नेवतिहऽ, नेवतिहऽ सीरी जगरनाथ[6] हे।
धरती से नेवतिहऽ सेसरनाथ[7] हे॥1॥
गाा से अयलन[8] गजाधर अयलन, अयलन सीरी जगरनाथ हे।
गंगा से गंगा मइया अयलन, अयलन बीर हनुमान हे।
धरती से अयलन सेसरनाथ हे॥2॥

शब्दार्थ
  1. लो
  2. सोने की सुपारी
  3. निमंत्रण दे आओ
  4. निमंत्रण दे आओ
  5. गजाधर भगवान
  6. जगन्नाथ
  7. शेषनाग
  8. आये