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लोरियाँ / भोजपुरी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

1

चंदा मामा, आरे आव, पारे आवऽ,
नदी के किनारे आवऽ
सोने की कटोरिया में
दूध भात ले ले आवऽ
बुचिया का मुंहवा में घूट! घूट!!
(अनेक जगह यह पंक्ति है - “बबुआ के मुंहवा में घुटुक”।)

2

घुघुवा मन्ना, उपजे चन्ना,
एही पड़े आवेले बबुआ के मामा।
उठा ले ले कोरा, थमा दे ले लड्डू,
छेदा देले नाक-कान
पहिरा देले बाला।

3

मामा मामी, अंगना,
बीच में मुचेंयना
मामी के ले गइले चोर,
मामा टकटोरेले।

4

आउरे गइया नाटी,
दूध दे भरि कांटी।
आउरे गइया अगरी,
दुधवा दे भरि गगरी।
हुंकुरति आउ गइया, चोकरति आउ।
घुंचवा भरत दूध लिहले आउ।
तोरे घूंचवा सोन्हाई
मोरा बाबुल के पिआउ।

5

आजा आजी के थूके?
सोने के कि माटी के?
आजा-आजी सोने के,
पितिया पीताम्भर के
लोग बिराना माटी के।

6

बबुआ कथू आवेले?
घोड़वा चढ़ल आवेले।
कथक नाचत आवेला।
आजी कथू आवेली?
डोला चढ़ल आवेली।
चवर डोलत आवेले।

7

बचवा के माई गइली पहार
ले अइली गजमोहरा के हार।
कुछ घइली असहड़,
कुछ घइली कसहड़,
कुछ घइली बबुआ गर हार।

8

मोरे बाबू, मोरे बाबू का करेले?
कोइनी फोरि-फोरि घर भरेले।
कोइनी का तेल में छपकि खेलेले।
(कोइनी कहुए का बीज)

9

मोर बचवा मोर बचवा का करेले?
मछरी मारि-मारि मगइया धरेले।
रीन्हेली बहिना हींग जीरा लाइ,
खाले भइया पोंछ फहराइ।
अवरा कूकुर कबरा खाला,
पोछिया डोलाई,
चल लउंड़िया जूठ बटोरे,
घुंघरू बजाइ।
खरिका देली बारी बिटिया
नथुना फलाइ।

10

हेले-हेले बबुआ,
कुसई में ढबुआ,
बाप दरबरुआ,
बेटवा लहैंडुआ
धिअवा नचनियां।

11

बाबू बाबू कहीला,
चमन के रारी ला,
चन्दन भइले थोरा,
मोरे बाबूल के मुंह गोरा।
अंखिया रतनारी,
भहुआं सोहे कारी।
बाबू की चोरिनी महतारी।
चटनी महतारी,
बाबू की चोरिनी बा फूआ,
चटनी बा फूआ ....।

12

अनर मनर पुआ पाकेला,
चीलर खोंइछा नोचेला।
चिलरू गइले खेत-खरिहान,
ले अइले तिलठिया धान।
ओही धान के रिन्हली बरवीर,
नेवति अइली बाम्हन फजीर।
बम्हना के पुतवा दिहले असीस,
जीअसु बचवा लाख बरीस।

13

आटा पाटा, बिलारी के बच्चा
बचवा का नव दस बेटा।
गोली गइया ह, नाटी गइया ह
धवरी ह, सोकनी ह।
खरवा खाले, पनिया पियेले,
कहवां जाले।

14

जिन्हि बाबुल देखि सिहइहें
तिन्हि नउजी बिअइहें।
बीअहू के बिअइहें त मेंगुची बिअइहें।

15

निनिया अवेले निनर वन से
उरदी मूंग ओही पटना से
खाट मांच निनिअउरा से।

16

चिरई चोंचा मुंह के बेबहरा,
पण्डितन से करे बकताई।
उठि के चोंचा तोर खोंता उजारबि,
छुटि जइहें बकताई।

17

हमार बाबू कथी के?
नौ मन सोना हीरा के,
माई लवंग के, बाप चौवा चन्दन के।
पीतिया पीतम्बर के,
नर लोग सभ माटी कंे
हमार बबुआ सोना के।

18

बबुआ बबुआ करेनी
चन्दन रगरेनी।
चन्दन भइले थोर,
बबुआ का मुंहवा गोर।

19

आउरे निनिया नीनरवन से
बाबू हमार अइले पटना से।

20

आऊरे गइया अगरी,
दुधवा ले आउ भरि गगरी
बाबू के पिआउ भर पेटुकी।


22

पौढ़िये लालन, पालनै हौं झुलावौं
स्वर पद मुख चख कमल लसंत
लखि लोचन भंवर भुलावों
आज विनोद मोद मंजुल मनि
किलकनि खानि खुलावौ
तेइ अनुराग ताग गुहिये कह
मति मृगनयनि बुलानि
तुलसी भनित भलो भामिनि उर
सो पहिराइ फुलावों।

23

सोइये लाल लाड़िले रघुराई
मगन मोद लिये गोद सुमित्रा
बार-बार बलि जाई
हंसे हंसत अनरसे अनरसत
प्रतिबिंबनि ज्यों भाई
तुम सबके जीवन के जीवन सकल सुमंगल दाई।

24

सो अपने चंचलपन सो
सो मेरे अंचल धन सो
पुष्कर सोता है निज सर में
भ्रमर सो रहा है पुष्कर में
गुंजन सोया कभी भ्रमर में
सो मेरे ग्रह गुंजन सो
तनिक पार्श्व परिवर्तन कर ले
उस नासापुटको भी भर ले
उभय पक्ष का मन तु हर ले
मेरे व्यथा विनोदन सो।
तेरी आँखों का सुस्पंदन
मेरे तप्त हृदय का चन्दन।

25

चन्दा मामा दौड़े आव
आरे आव पारे आव
नदिया किनारे आव
सोनवा कटोरी में के
दूध - भात लेले आव
बबुआ के मुँह में घुटूक।

26

सुतेरे होरो लाल
तार बप्पा बांस काटै गेल
बांस के कटैया
तीन सेर मरूआ
कुटि - पीसो तीन रोटी भेल
एक रोटी छोरा छोरी
एक रोटी बुढ़वॉ
तेखर रोटी बुढ़िया
छूछे अकेल
सून रे हीरो लाल
तोर बप्पा बांस काटे गेल।

27

नै खोजहि माय के
नै लिहिं बाप के नाम
माय गेली कूटे - पीसे
बाप गेली गाँव
चचा गेलो छप्पर-छारे
चाची के दुखली कान
यहाँ एगो बैठल छीयो
हमहि ठाने-ठास।

28

अलिया के झलिया में
गोला बरद खेत खाय छो गे
कहमा गे डीह पर गे
डीह छूटल परबतिया गे
हाँकू बेटी लक्ष्मी
गोर में देबौ पैजनी
बाबू कहां गेल खुन गे
बाप गेलौ पुरनिया में
लै लौ लाल लाल बिछिया में