भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

लोरी / श्रीप्रसाद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मेरा गोद खिलौना रे
सोया मेरा छौना रे!

झूला झूले सोने का
झूले रेशम की डोरी
मीठे सपनों में खोया
सुन-सुन परियों की लोरी।

मेरा डीठ डिठौना रे
सोया मेरा छौना रे!

चाँद, सितारे जाग रहे
नाच रही है चाँदनिया,
फूल खिले हैं चाँदी के
फूली मेरी आँगनिया।

मेरा सुख अनहोना रे
सोया मेरा छौना रे!

गीत सुनाऊँ, सोये तू
तू सोये औ गाऊँ मैं,
जागे, खेले, रूठे तू
हँस-हँस तुझे मनाऊँ मैं।

मेरा लाल सलौना रे
सोया मेरा छौना रे!