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वंशी रचाये ओहि ठाम श्याम जहाँ रास रचे / मैथिली लोकगीत

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

वंशी रचाये ओहि ठाम श्याम जहाँ रास रचे
मधुर मृदंग धुम किट-किट बाजे, वंशी करय अनोर
नाचथि सखि संग करथि कुतूहल, चहुँ दिस कुहुकय मोर
केओ सखि पुहुप माल पहिराबथि, चानन आंग लगाय
केओ सखि कर धय चमर डोलाबथि, नयना रहय जुड़ाय
जगमगाय कत दामिनि यामिनि, सखिगण कंठक हार
साओन घटा श्याम तन सुन्दर, कुंजहिं करथि बिहार
इन्द्र सहित इन्द्रासन डोलल, पातालहूँ नहि चैन
शिवसनकादिक ध्यान छुटल जँ, पलको ने लागै नैन
साहेबराम रास वृन्दावन, तोहे छाड़ि भाव न आन
जहाँ बसथि त्रिभुवनपति ठाकुर, लागल तहि ठाँ ध्यान