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वरना भूल चुका होता बहुत कुछ / श्याम सुशील

थोड़ी-सी मिट्टी
थोड़ी-सी हवा
थोड़ी-सी धूप
थोड़ा-सा पानी लेकर
मैं आया था यहाँ

आज सोचता हूँ
अच्छा हुआ खाली हाथ
नहीं आया
वरना भूल चुका होता
बहुत कुछ ।