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वादे किये जो जिसको निभाने नहीं होते / रंजना वर्मा

वादे किये जो जिसको निभाने नहीं होते।
उसके तो कोई दोस्त पुराने नहीं होते॥

मिलता ही नहीं वह जो समझ जाये दिलों की
सब को तो हरिक राज़ बताने नहीं होते॥

सूखे हुए पत्तों को चलो अब तो समेटें
माजी की तरह से ये उड़ाने नहीं होते॥

लम्हे थे कई याद के लिक्खे जो सफ़े में
अब उनमें नये लफ्ज़ बढ़ाने नहीं होते॥

रिश्तों को बनाना तो कोई ऐब नहीं है
पर खून के नाते भी भुलाने नहीं होते॥