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Kavita Kosh से
तुम्हारे रसपान के वास्ते ही तैयार किया गया है यह आसव
गो कि गहरी नींद में डूबे सोए पड़े है पेड़
'''अँग्रेज़ी से अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह'''
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