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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए / ख़ुमार बाराबंकवी
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14:08, 31 मार्च 2011
कोई धोखा न खा जाए मेरी तरह
ऐसे खुल के न सबसे मिला कीजिए
अक्ल-ओ-दिल अपनी अपनी कहें जब 'खुमार'
अक्ल की सुनिए, दिल का कहा कीजिये
</poem>
{{KKMeaning}}
Kartikey agarwaal khalish
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