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Kavita Kosh से
<poem>
जो नज़र प्यार की कह गयी है, मुँह पे लाने की बातें नहीं है
हम सुना तो रहे बेसुधी में, वे सुनाने की बातें नहीं है
हमने माना कि तुम हो हमारे, याद करते रहोगे हमेशा
दूर जाने की बीतें हैं प् पर ये, पास आने की बातें नहीं है
ज़िन्दगी खींच कर हमको लायी किन सुलगती हुई बस्तियों में