गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
हाइकु / कमलेश भट्ट 'कमल'
4 bytes added
,
13:58, 10 अगस्त 2011
<poem>
मुँह चिढ़ाती
लम्बे
-
चौड़े पुल को
सूखती नदी ।
गावों
गाँवों
से लाता
शुद्ध आक्सीजन भी
वश न चला ।
रात होते ही
गोलबन्द हो गये
चाँद
-
सितारे ।
घिर गया है
विषैली लताओं से
जीवन
-
वृक्ष ।
वीरबाला
4,963
edits